सीबीआई ने AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती प्रक्रिया में घोटाले की जांच के तहत छापेमारी की। साथ ही, संस्थान में पारंपरिक खाद्य पदार्थों के स्वास्थ्य लाभों पर शोध भी जारी है।

भर्ती घोटाले में CBI की छापेमारी
AIIMS भुवनेश्वर, जो देश के प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्थानों में से एक है, हाल ही में एक भर्ती घोटाले के आरोपों के चलते विवादों में आ गया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने संस्थान में भर्ती प्रक्रिया में अनियमितताओं के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 20 फरवरी 2025 को छापेमारी की।
क्या है पूरा मामला?
सीबीआई को सूचना मिली थी कि AIIMS भुवनेश्वर में भर्ती प्रक्रिया में धांधली की गई थी, जिसमें एक ही परिवार के पांच सदस्यों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी दी गई थी। आरोपों के मुताबिक, इन सभी को स्थायी पदों पर नियुक्त किया गया था, जिनमें तीन रिकॉर्ड क्लर्क और दो स्वच्छता निरीक्षक शामिल थे।
CBI ने कैसे की छानबीन?
🔹 सीबीआई की 9 सदस्यीय टीम ने AIIMS भुवनेश्वर के शैक्षणिक ब्लॉक में लगभग 5 घंटे तक छानबीन की।
🔹 इस दौरान 27 कर्मचारियों से पूछताछ की गई और कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए।
🔹 संभावित घोटाले में शामिल अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
🔹 इस घोटाले से संस्थान की भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं।
इस मामले में जांच अभी जारी है, और यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो कई बड़े नामों पर कार्रवाई हो सकती है।
AIIMS Bhubaneswar का स्वास्थ्य अनुसंधान: ‘पखाला’ के फायदों पर वैज्ञानिक अध्ययन
जहां एक ओर AIIMS भुवनेश्वर भर्ती घोटाले को लेकर सुर्खियों में है, वहीं दूसरी ओर संस्थान में पारंपरिक खाद्य पदार्थों के वैज्ञानिक विश्लेषण पर शोध भी जारी है।
क्या है ‘पखाला’?
‘पखाला’ (Pakhala) एक पारंपरिक ओड़िया व्यंजन है, जिसमें पके हुए चावल को पानी में भिगोकर रखा जाता है। यह खासतौर पर गर्मियों में खाया जाता है और माना जाता है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद और शरीर को ठंडा रखने वाला भोजन है।
AIIMS भुवनेश्वर का अध्ययन
AIIMS भुवनेश्वर के शोधकर्ताओं ने ‘पखाला’ और उसकी ‘तोरणी’ (पखाला का पानी) के स्वास्थ्य लाभों पर शोध किया है। अध्ययन के अनुसार:
✅ आंतों के लिए फायदेमंद: पखाला में मौजूद बैक्टीरिया अच्छे प्रोबायोटिक्स की तरह काम करते हैं।
✅ पोषक तत्वों से भरपूर: यह विटामिन B12 और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्वों का अच्छा स्रोत है।
✅ गर्मी में राहत: शरीर को डिहाइड्रेशन से बचाने में मदद करता है।
शोध का महत्त्व
🔹 यह अध्ययन 2020 में शुरू हुआ था और अब अपने अंतिम चरण में है।
🔹 शोधकर्ताओं का मानना है कि ‘पखाला’ को वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित करने के बाद इसे वैश्विक स्तर पर लोकप्रिय बनाया जा सकता है।
🔹 इस रिसर्च के परिणाम AIIMS भुवनेश्वर जल्द ही राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित करेगा।
AIIMS Bhubaneswar इस समय दो विपरीत घटनाओं के कारण चर्चा में है। एक तरफ भर्ती घोटाले की जांच संस्थान की साख को प्रभावित कर सकती है, तो वहीं दूसरी ओर पारंपरिक खाद्य पदार्थों के वैज्ञानिक विश्लेषण पर शोध इसकी प्रतिष्ठा को और ऊंचा कर सकता है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सीबीआई की जांच क्या निष्कर्ष निकालती है और ‘पखाला’ पर शोध कितनी नई जानकारियां सामने लाता है।
‘पखाला’ (Pakhala) एक पारंपरिक ओड़िया व्यंजन है, जिसमें पके हुए चावल को पानी में भिगोकर रखा जाता है। यह खासतौर पर गर्मियों में खाया जाता है और माना जाता है कि यह पाचन के लिए फायदेमंद और शरीर को ठंडा रखने वाला भोजन है।
AIIMS Bhubaneswar के शोधकर्ता ओड़िया पारंपरिक व्यंजन “पखाला” पे अध्यन कर रहे है।





